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Sheru Chandan News : शेरू और चन्दन की दोस्ती में कब आई दरार, पढ़िए दोस्ती और दुश्मनी की पूरी कहानी

गैंगस्टर चंदन मिश्रा के हत्या का आरोप शेरू उर्फ ओंकारनाथ सिंह (Sheru Chandan) पर है. ये वही शेरू जो कभी चंदन का जिगरी हुआ करता था. जेल में मुलाकात के बाद दोनों के बीच यारी बढ़ी. बाहर निकले तो गैंग बना ली.

लगभग 10 साल पहले पूरे शाहाबाद में शेरू सिंह और चंदन मिश्रा (Sheru Chandan) गिरोह का आतंक था. गिरोह ने अपना दबदबा शाहाबाद के चारों जिलों भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर में बना लिया. और एक एक करके घटना को अंजाम देने लगे. आरा में कोचिंग संचालक से लेकर जेल में ड्यूटी पर तैनात सिपाही की हत्या की. बक्सर के चूना कारोबारी राजेंद्र केसरी की ऐलान कर हत्या की, उसके बाद गिरोह सबकी नजर में चढ़ गया.

लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ, कि दो जिगरी यार एक-दूसरे के दुश्मन बन गए

दैनिक भास्कर के मुताबिक चन्दन ने पिता की राइफल से की थी पहली हत्या, बक्सर के सोनवर्षा क्रिकेट ग्राउंड में क्रिकेट खेलने के दौरान गांव के ही सोनू मिश्रा से झगड़ा हो गया. चंदन इसकी शिकायत करने सोनू के घर गया. वहां उसकी पिटाई कर दी गई. वापस घर आया. पिता की लाईसेंसी राइफल उठाई और सोनू मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी. लोगों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया. इंटर कॉमर्स के स्टूडेंट के अपराध की राह पकड़ने की शुरुआत यहीं से हुई. साढ़े तीन साल जेल में रहा. इसके बाद घर वालों ने नाबालिग होने का प्रमाण दिया तो उसे सीजेएम ने रिमांड होम भेज दिया. बक्सर कोर्ट में पेशी के दौरान अक्टूबर 2010 में चंदन फरार हो गया.

जेल में हुई चंदन और शेरू की दोस्ती

शेरू अपने चाचा की हत्या कर जेल गया था. वहीं, चंदन मिश्रा मारपीट के मामले में जेल में बंद था. इसी दौरान साल 2009 में दोनों की दोस्ती हो गई. नाबालिग होने के कारण दोनों जल्द जेल से रिहा भी हो गए. बाल सुधार गृह में ये दोनों पक्के दोस्त बन गए. जब ये बाहर आए तो पूरी तरह से अपराधी बन गए. इन्होंने अपना एक गिरोह बनाया और फिर रंगदारी मांगने का सिलसिला शुरू हो गया.

इन दोनों का नाम हत्या और रंगदारी के बड़े मामलों में आता रहा. इसमें चूना व्यवसायी राजेंद्र केसरी, जेलकर्मी हैदर अली, भरत राय और शिवजी खरवार जैसे लोगों की हत्या शामिल है.

पूर्व मुखिया नौशाद बना पहला शिकार

चंदन-शेरू (Sheru Chandan) की जोड़ी का पहला मर्डर नया भोजपुर पंचायत (बक्सर) के पूर्व मुखिया नौशाद का था. चंदन के इकबालिया बयान के मुताबिक नौशाद चंदन के गांव के ही एक शख्स से मिलकर चंदन मिश्रा और शेरू सिंह की हत्या कराना चाहता था. इलियास मियां लाइनर का काम कर रहा था. हालांकि चंदन या शेरू नौशाद को नहीं पहचानते थे. पहचान कराने के लिए अपने एक सहयोगी की मदद ली. दोनों ने अपने एक सहयोगी के साथ नौशाद का बाइक से पीछा किया. हाईवे पर एस्सार पेट्रोल पंप के पास ओवरटेक कर नौशाद के सिर में नाइन एमएम की गोलियां उतार दीं. दोनों के पास नाइन एमएम की पिस्टल थी.

आरा जेल गेट पर सिपाही का मर्डर

2007-2008 तक शेरू-चंदन (Sheru Chandan) गिरोह भोजपुर और बक्सर में एक्टिव रहा है. रंगदारी और फिरौती इस गैंग की कमाई का जरिया था. इस गैंग के निशाने पर ठेकेदार से लेकर दुकानदार तक रहते थे. बताया जाता है कि शेरू-चंदन गैंग के गुर्गे बक्सर के मौलाबाग इलाके में रहा करते थे. 16 जुलाई 2012 को आरा जेल गेट पर बाइक सवार दो अपराधियों ने कारा सिपाही मो. हामिद (रांची) की गोली मारकर हत्या कर दी थी. चंदन-शेरू गैंग ने साल 2009 के बाद 2011 में 6 हत्याएं की थी. इसके बाद 2012-2013 में एक-एक हत्या की थी.

शेरू ने कोर्ट में सिपाही का किया मर्डर

भोजपुर चुना भंडार के मालिक राजेंद्र केसरी की हत्या 21 अगस्त 2011 को हुई थी. रंगदारी देने से मना करने पर एक दिन पहले चंदन मिश्रा से ऐलान करते हुए कहा था कि कल मारूंगा और चंदन ने ऐसा ही किया था.

इसी हत्याकांड के बाद दोनों कोलकाता भाग गए थे, जहां से इन दोनों की गिरफ्तारी हुई थी. बक्सर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर 17 दिसंबर, 2012 को कोर्ट में पेश किया था. इस दौरान शेरू सिंह ने कोर्ट में मौजूद सिपाही का हथियार छिनते हुए उसे गोली मारकर दीवार फांद कर फरार हो गया था. हालांकि, कुछ दिनों बाद आरा से पुलिस ने शेरू को अरेस्ट कर लिया. एक बार फिर से चंदन और शेरू बक्सर जेल में बंद हो गए.

दैनिक भास्कर के मुताबिक चंदन-शेरू गैंग पर 10 से ज्यादा हत्याओं के केस

  • 6 सितंबर, 2009 सिमरी में अनिल सिंह की हत्या.
  • 10 मार्च, 2011 बक्सर औद्योगिक थाना क्षेत्र में पूर्व मुखिया मो. नौशाद की हत्या.
  • 20 अप्रैल, 2011 बक्सर औद्योगिक थाना क्षेत्र में भरत राय की हत्या.
  • 26 जुलाई, 2011 बक्सर औद्योगिक थाना क्षेत्र में शिवजी खरवार की हत्या.
  • 31 जुलाई, 2011 बक्सर टाउन थाना इलाके में मो. निजामुद्दीन की हत्या.
  • 4 मई, 2011 शेरू के गैंग ने बक्सर टाउन थाना क्षेत्र में जेल के एक क्लर्क हैदर अली की हत्या की.
  • 21 अगस्त, 2011 भोजपुर के चुना व्यवसायी राजेंद्र केसरी को बक्सर टाउन थाना इलाके में हत्या.
  • 11 अप्रैल, 2012 आरा नवादा थाना ब्लॉक रोड के ठीक सामने स्थित गली में कोचिंग संचालक हरि नारायण सिंह की हत्या कर दी थी.
  • 2013 आरा के टाउन थाना क्षेत्र के जेल गेट के सामने सिपाही हामिद अंसारी की हत्या करने में आरोपित.

2015 में पहली बार जेल में भिड़े चंदन और शेरू

2015 में 23 जुलाई की शाम अचानक बक्सर जेल में मारपीट की घटना हुई. पता चला कि जेल में दोनों चंदन और शेरू गैंग (Sheru Chandan) आपस में भिड़ गए हैं. यहीं से यह बात सामने आई की दोनों की जोड़ी अब अलग हो गई है. उस वक्त मारपीट मामले में नगर थाना प्रभारी कारा पहुंचे और मामले की छानबीन की. 9 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. मारपीट की वजह रंगदारी के पैसों का बंटवारा था.

10 साल बाद दोनों की दोस्ती में दरार की खबरें अब सबके सामने थीं. उसके बाद चंदन मिश्रा बक्सर जेल से भागलपुर और फिर पटना के बेऊर जेल में शिफ्ट हुआ था. शेरू सिंह को निचली अदालत ने फांसी की सजा दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया था.

शेरू को शक था चंदन पुलिस के साथ मिल गया

इस घटना के बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए. दोनों अपनी-अपनी (Sheru Chandan) गैंग ऑपरेट करने लगे. शेरू को शक हो गया कि चंदन पुलिस के साथ मिल चुका है. बताते हैं कि, कोर्ट में पुलिस की हत्या करने के बाद शेरू के साथ चंदन नहीं भागा था. शेरू को यहीं से शक होना शुरू हो गया था कि उसके जिगरी ने साथ क्यों नहीं दिया. उसके बाद दोनों की जेल में भिड़ंत ने दुश्मनी की दरार और बढ़ा दी.

अस्पताल में घुसकर गैंगस्टर चंदन मिश्रा का मर्डर

जुर्म की दुनिया में कोई बादशाह नहीं बन सकता है, शयद यह बात चन्दन को मालूम हो गया था. चन्दन के पिता के अनुसार वह अब जुर्म की दुनिया को छोड़कर सामाजिक जीवन जीना चाहता था. मगर यह बात शयद शेरू गैंग को रास नहीं आई. शेरू गैंग को चन्दन के अस्पताल में भर्ती से लेकर तमाम गतिविधिया सोशल मिडिया से मिलती रही.

और इसका फायदा उठाते हुवे गुरुवार की सुबह पारस अस्पताल में भर्ती गैंगस्टर चंदन मिश्रा की हत्या कर दी गई. पांच शूटर सुबह करीब 7 बजे अस्पताल में घुसे और पिस्टल लिए सेकेंड फ्लोर पर पहुंच गए. यहां कमरा नंबर 209 में चंदन मिश्रा था. बदमाशों ने कमरे के अंदर घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां चंदन पर बरसा दीं. और इस तरह से कुख्यात चन्दन का अंत हो गया.

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