बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राज्य के प्रमुख दलों की चुनौतियां छोटे छोटे दलों के चुनावी रण में उतरने से बढ़ गई हैं. वो दल जिन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव प्रमुखता के साथ लड़ने की घोषणा कर दी हैं. ऐसे कई दल हैं, जिनका किसी भी दल से गठबंधन नहीं है और न वो कोई तीसरा फ्रंट बनाने की ही सोच रहे हैं.

खासकर विधानसभा चुनाव का परिणाम जहां 1000 मतों से भी प्रभावित होते हो, ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में यह मुख्य दलों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. जनसुराज और एआईएमआईएम के अलावा ऐसे कौन कौन से दल है जो प्रमुखता से बिहार में चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, जानिए यहां.
द प्लुरल पार्टी
द प्लुरल पार्टी की नेता पुष्पम प्रिया चौधरी एक बार फिर चुनावी जंग में सक्रिय हो गई हैं. बिहार विधानसभा 2025 के लिे अपनी पूरी तैयारी की जानकारी उन्होंने पिछले शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीं. उन्होंने इसी संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी कि द प्लुरल पार्टी राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

उन्होंने इस दौरान यह भी जानकारी दी कि वे स्वयं दरभंगा से लड़ेगी और कहा कि दरभंगा उनका घर भी है. पर इस बार उनका एक अलग अंदाज सामने आया. प्रेस कॉन्फ्रेंस में वे मास्क लगा कर आई थीं. मास्क लगाने पर जब पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने कहा कि अगर कोई भी दल मुख्यमंत्री के रूप में महिला को आगे लाता है तो वो मास्क उतार देंगी. ज्ञात हो कि 8 मार्च 2020 में महिला दिवस के मौके पर उन्होंने अपनी पार्टी की स्थापना की थी और पिछले बिहार विधानसभा 2020 के चुनावी जंग में उतरी थी. तब प्लूरल्स पार्टी को चुनाव चिन्ह सीटी मिली थी.
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आजाद समाज पार्टी
बिहार विधानसभा चुनाव में अब उत्तर प्रदेश की भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है. पटना में बुधवार को आजाद समाज पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जौहर आजाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पार्टी राज्य की 100 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. इनमें से 60 सीटों पर विधानसभा प्रभारी भी नियुक्त किए जा चुके हैं. बाकी सीटों पर तैयारियां अंतिम चरण में हैं.
जन सुराज
पी.के के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) पहले दूसरी पार्टियों के लिए कैंपेन चलाते थे. अब खुद अपनी पार्टी चला रहे हैं. उनकी पार्टी जन सुराज इन दिनों बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से पहले काफी सुर्खियों में है. वो खुद को इस बार राजद और जदयू के बाद तीसरा सबसे मजबूत प्रतिभागी बता रहे हैं.
बिहार चुनाव में एक तरफ जहा राजद के पास पहले से अपना मुस्लिम वोट बैंक हैं, वही जेडीयू के पास भी मुस्लिम आबादी वाले इलाके में अच्छी खासी पकड़ हैं. लेकिन इस बार पीके (Prashant Kishore) दोनों दलों के इस वोट बैंक को साधने के लिए अपने प्लान के मुताबिक शतरंज के मुहरे तैयार कर रहे हैं. चुकी जिस अनुपात में पीके इस बार मुसलमानों को टिकट देने की बात कर रहे हैं. इससे साफ तौर पर जाहीर होता हैं कि राजद और जेडीयू में सेंधमारी होने वाली हैं. फ़िलहाल जन सुराज 243 सीटो पर चुनाव लड़ेगी.
निशिकांत सिन्हा की जन आशीर्वाद पार्टी
बिहार यूथ आइकॉन के नाम से मशहूर निशिकांत सिन्हा की एक प्रभावशाली छबि हैं. सिन्हा अभी हाल ही में जन आशीर्वाद दल का गठन किये हैं. इनके सभा में लगभग सभी जगहों पर कुशवाहा वोटरों की भीड़ देखने को मिल रही हैं. सिन्हा की मजबूत कड़ी ये है कि वे अपने भाषण में सम्राट अशोक महान और जगदेव बाबू के नाम को काफी प्राथमिकता दे रहे हैं.
इनमें अच्छी बात ये है की ये उन मुद्दों की बात कर रहे है, जिनको लेकर बिहार में बदलाव हो सके. हालंकी उनके भाषणों में पलायन और बेरोजगारी का एक गंभीर मुद्दा जरूर है, मगर इस मुद्दों को पहले ही जन सुराज ने हैक कर लिया हैं. ऐसे में निशिकांत सिन्हा भी लगभग 100 सीटो पर चुनाव की तैयारी कर रहे है.
शिवदीप लांडे की हिंद सेना
बिहार के चर्चित पूर्व आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे की राजनीतिक पार्टी हिंद सेना भी आगामी बिहार विधानसभा के चुनावी जंग में उतरने जा रही है. पटना के एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लांडे ने कहा था कि उनकी पार्टी राष्ट्रवाद, सेवा और समर्पण के सिद्धांतों पर काम करेगी और बिहार की जनता की आवाज बनने का प्रयास करेगी. उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि वो बिहार की सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे.
इंडियन इंकलाब पार्टी
पटना के गांधी मैदान में हुए विशाल अखिल भारतीय पान महासंघ के सम्मेलन में भी एक नई पार्टी इंडियन इंकलाब पार्टी की घोषणा हुई. यह घोषणा अखिल भारतीय पान महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई. आईपी गुप्ता ने की. इन्होंने कहा कि अब तक हाशिए पर रखे गए तबकों की आवाज को सत्ता तक पहुंचाने का समय आ गया है. यह पार्टी सिर्फ चुनाव लड़ने नहीं, बल्कि इतिहास रचने आई है. आने वाले चुनाव में इंडियन इंकलाब पार्टी 243 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी.
गठबंधन से इतर भी मिलेगी चुनौतियां
जाहिर है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ गठबंधन के बीच की लड़ाई नहीं रह गई है. इस जंग में गठबंधन, कुछ प्रमुख दल ही नहीं, कुछ छोटी छोटी पार्टियां भी गंभीरता के साथ चुनाव लड़ रही हैं. इनकी उपस्थिति जीत-हार का भी कारण बन सकती है.
खास कर जातीय धारणा का साथ बनी आजाद समाज पार्टी जिसका आधार वोट दलित है. इंडियन इंकलाब पार्टी जिनका आधार वैश्य का बड़ा वर्ग है. साथ इसके हिंद पार्टी ,प्लूरल्स पार्टी भी इस चुनाव को प्रभावित करने का दम-खम रखती है. इनके अलावा जनसुराज, जन आशीर्वाद और एआईएमआईएम तो पहले से ही मुस्तैदी से चुनाव को रोचक बनाने में लगे हैं.


