बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए हो या राहुल-तेजस्वी वाली महागठबंधन, सीट शेयरिंग (Seat sharing ) को लेकर दोनों ही एलायंस की सांसे फूल रही है. ज्यादा से ज्यादा हिस्सेदारी की खातिर दोनों ही गठबंधन अपने साथी दलों के नखरे झेल रहे हैं.

महत्वाकांक्षा इतनी बढ़ गई है कि गठबंधन में शामिल हर एक दल को लगता है कि उनकी बदौलत ही सत्ता समीकरण साधा जा सकता है. जानते हैं महागठबंधन और एनडीए के नेतृत्वकर्ता किस दबाव के बीच सीट शेयरिंग के मुद्दे को सुलझाने में लगे हैं.
महागठबंधन के लिए सबसे बड़ी फांस कांग्रेस
महागठबंधन के भीतर दबाव की राजनीति तो शुरुआत से ही दिखने लगी थी. कांग्रेस शुरू से ही 70 सीटों (Seat sharing) के डिमांड पर अड़ी थी. लेकिन तब ऐसा लगता था कि स्ट्राइक रेट कम होने के कारण और साथी दलों को साथ लेकर चलने के लिए कांग्रेस कुछ सीटों की कुर्बानी करेगी. लेकिन राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा के बाद कांग्रेस की लोकप्रियता क्या बढ़ी, कांग्रेस के दावे भी बढ़-चढ़ कर आने लगे हैं.

कांग्रेसी सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने अपनी डिमांड को परिमार्जित किया. तेजस्वी यादव के सामने कांग्रेस के दो ऑप्शन आए हैं.
- पहला ऑप्शन है कि 50 सीट और उपमुख्यमंत्री की कुर्सी.
- दूसरा डिमांड 70 सीटों पर लड़ने की है. मगर, इसमें भी एक शर्त है कि गत चुनाव में जो हराऊ सीट दिए गए थे उनके बदले में विधासनसभा क्षेत्र की सूची भी दे दी गई है.
- तीसरी शर्त है कि संख्या के साथ-साथ हर जिले में कम से कम एक सीट हो और ज्यादा भागीदारी शाहाबाद और सीमांचल में मिले.
सीट शेयरिंग (Seat sharing) पर कांग्रेस की ये मांग मान लेना आसान नहीं है. अब बातचीत के दौरान समझौता क्या होता है, ये देखना अभी बाकी है.
माले और वीआईपी के नखरे भी कम नहीं
कांग्रेस के बाद सीट शेयरिंग (Seat sharing) को लेकर तेजस्वी के लिए सबसे बड़े सिरदर्द वीआईपी के सुप्रीमो मुकेश सहनी होने जा रहे हैं. मुकेश सहनी ने पहले ही साठ सीटों के साथ एक उपमुख्यमंत्री के पद का भी डिमांड किया है. इधर, हाल में वीआईपी ने नए साथी दलों को जुड़ने पर 40 से 50 सीटों का डिमांड किया है, मगर उपमुख्यमंत्री का डिमांड पूरा होने के साथ सीपीआईएमएल (माले) ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के स्ट्राइक रेट के हवाले से 50 सीटों का डिमांड किया है. सीपीईएमएल ने तो 24 विधानसभा सीटों की सूची भी सौंप दी है.
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एनडीए में चिराग-मांझी-कुशवाहा पेंच
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए में सीट शेयरिंग (Seat sharing) को लेकर सबसे बड़ा पेंच लोजपा (आर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान बनने जा रहे हैं. प्रारंभ में उनकी डिमांड 40 सीटों के आसपास थी. मगर, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते गया चिराग पासवान का डिमांड वाया मीडिया बढ़ने लगा. उनके बहनोई जमुई के सांसद अरुण भारती ने तो उपमुख्यमंत्री के डिमांड के साथ-साथ सीटों के कम से कम और ज्यादा से ज्यादा की लकीर खींच दी.
सांसद अरुण भारती का कहना है कि मेरी हिस्सेदारी 43 और 137 के बीच होनी चाहिए. अब यहां से नीतीश कुमार के संकट का पता चलता है. पिछली बार अकेले चुनाव में उतरकर जदयू को नंबर वन से नंबर तीन की पार्टी बना दी थी.
वही दबाव तो हम पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने भी 20 सीटों (Seat sharing) का बनाया. मगर, इधर वे 10 सीटों पर आ गए हैं. वो भी इसलिए कि उन्हें इस बात का मलाल है कि उनकी विधायकों की संख्या 8 तक भी पहुंच जाए तो राज्यस्तरीय पार्टी का दर्ज मिल जाए. भागीदार तो रालोमो की भी है. रालोमा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की तरफ से 15 सीटों का डिमांड आया है.


