दिनारा विधानसभा (Dinara Assembly Constituency) बिहार के 243 विधानसभा सीटों में से एक हैं. इस सीट पर पिछले दो चुनावों में सियासी समीकरण बदलते रहे हैं. 2010 और 2015 में JDU की जीत के बाद, 2020 में RJD ने इस सीट पर कब्जा जमाया. आगामी चुनावों में इस सीट पर कौन बाजी मारेगा, यह देखना दिलचस्प होगा.

बिहार की रोहतास जिले की दिनारा विधानसभा (Dinara Assembly Constituency) सीट, जो कभी जनता दल यूनाइटेड (JDU) का मजबूत गढ़ मानी जाती है, अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के लिए चुनौती बन चुकी है. आइए जानते हैं इस सीट के चुनावी इतिहास और पिछले तीन चुनावों के आधार पर सियासी समीकरणों का विश्लेषण.
दिनारा विधानसभा का चुनावी इतिहास
दिनारा विधानसभा क्षेत्र (Dinara Assembly Constituency) का चुनावी इतिहास विविधताओं से भरा हुआ है. 1980 और 1985 में कांग्रेस के लक्ष्मण राय से लगातार दो चुनावों में शिकस्त खाने के बाद, रामधनी सिंह ने 1990 में जोरदार वापसी की और जनता दल के टिकट पर दो बार और जनता दल यूनाइटेड से 2000 और 2005 में दो बार. कुल मिलाकर चार बार विधायक चुने गए.

हालांकि, नवंबर 2005 में हुए चुनाव में उन्हें बहुजन समाज पार्टी की सीता सुंदरी देवी के हाथों हार का सामना करना पड़ा. 2010 में जनता दल यूनाइटेड ने फिर से वापसी की और पार्टी के कद्दावर नेता जय कुमार सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल की सीता सुंदरी देवी को हराया दिया था.
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भारतीय जनता पार्टी की बड़ी हार
2015 के विधानसभा चुनाव में, JDU के जय कुमार सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राजेंद्र प्रसाद सिंह को मात्र 2,691 वोटों के अंतर से हराया. साल 2020 के विधानसभा चुनाव में, RJD के विजय मंडल ने लोक जन शक्ति पार्टी (LJP) के राजेंद्र सिंह को 8,228 वोटों के अंतर से हराया. विजय मंडल को जहां 59,541 वोट मिले, वही राजेंद्र सिंह को 51,313 वोट मिले थे.
ऐसे में एक बार फिर से 2025 में विधानसभा के चुना होना है. दिनारा विधानसभा (Dinara Assembly Constituency) का माहौल क्या है? जय कुमार सिंह, विजय मंडल या राजेंद्र सिंह. बनते बिगड़ते सामाजिक समीकरण में दिनार का जनता किसे चुनती है ये आने वाला समय तय करेगा.


