सोने की कीमतों (Gold Price) में लगातार उछाल से इस कीमती धातु का भाव रिकार्ड स्तरों पर पहुंच गया है, और 90000 के आसपास कारोबार कर रहा है. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अनुसार, सोना (999 शुद्धता) 17 मार्च 2025 को लगभग 88,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था.
ऐसे में कुछ निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या अब गोल्ड में मुनाफावसूली करनी चाहिए? इस पर एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है. वहीं, सोना निकट अवधि और लंबी अवधि के निवेश के नजरिये से शेयर मार्केट पर बढ़त बनाए हुए है.
सोने के भाव गिरेंगे या नहीं
सोने में मुनाफावसूली को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड की चाल में यह बेहतर प्रदर्शन जल्द ही खत्म हो सकता है. सोने के भाव में गिरावट हो सकती हैं. इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, क्वांटम एएमसी के सीआईओ चिराग मेहता का मानना है कि “वर्तमान में चल रही कई डिप्लोमेटिक डायलॉग से ज्यादा स्थिर अंतरराष्ट्रीय माहौल बन सकता है. इसके अलावा, महंगाई भी काबू में आ रही है.” वेंचुरा सिक्योरिटीज ने एक नोट में बताया कि मजबूत डॉलर और अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में और कटौती की कम संभावना भी सोने की कीमतों पर अंकुश लगाएगी.
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2024-25 में लगातार सोने में उछाल देखने को मिली
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सोने का निकट-अवधि रिस्क-रिवॉर्ड ज्यादा फेवरेबल नहीं है. उधर, सोने के पिछले प्राइस बिहेवियर को देखा जाए, तो यह ओवरबॉट लग रहा है. उदाहरण के लिए, 1970 के दशक से सोने की कीमतों के विश्लेषण से पता चलता है कि सोने की कीमत और उसके 200 डे मूविंग एवरेज के बीच मौजूदा डाइवर्जेंनस असामान्य रूप से बड़ा है. इस पैटर्न ने हमेशा सोने की कीमतों में लंबे समय तक कमजोरी की शुरुआत का संकेत दिया है, वह भी शानदार तेजी के बाद.
हर बार जब सोने में बहुत ज़्यादा बढ़त देखने को मिली, तो कई बार खराब प्रदर्शन की अवधि भी देखने को मिली है. फंड्सइंडिया के आंकड़ों के अनुसार, 1980 के बाद से सोने में तीन मौकों पर 30% से ज़्यादा की गिरावट आई है. फिलहाल मार्च महीने तक सोने में स्थिरता के संकेत हैं.