नीतीश कुमार की सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्य के दौरे पर आए 16वें वित्त आयोग के समक्ष विशेष राज्य के दर्जे (Special State Status) की मांग उठाई.. आयोग के अध्यक्ष और प्रख्यात अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने राज्य सरकार का ज्ञापन प्राप्त करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया. उन्होंने कहा, ‘विशेष दर्जे की मांग राज्य सरकार द्वारा हम लोगों को दिए गए एक ज्ञापन का हिस्सा है. यह वित्त आयोग के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है.’
बिहार ने फिर उठाई विशेष राज्य के दर्जे की मांग
अरविंद पनगढ़िया ने कहा, ‘यह एक लंबी प्रस्तुति थी, जो मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य कैबिनेट सहयोगियों के अलावा शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति में दी गई…. बिहार से पहले हम 20 राज्यों का दौरा कर चुके हैं. हमारा दौरा पिछले साल जून में निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान लागू आदर्श आचार संहिता हटाए जाने के बाद शुरू हुआ था.’
जानिए क्या हुआ वित्त आयोग के सामने
उन्होंने कहा, ‘फिलहाल किसी भी राज्य को विशेष श्रेणी (Special State Status) का दर्जा नहीं है. यह योजना आयोग के अधीन हुआ करता था. राज्यों को विशेष और सामान्य श्रेणियों में विभाजित किया गया था. लेकिन योजना आयोग के साथ ही यह विशिष्टता समाप्त हो गई.’ उल्लेखनीय है कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता में आने के कुछ महीनों बाद, योजना आयोग की जगह नीति आयोग बनाया गया और पनगढ़िया इसके पहले उपाध्यक्ष बने.
बिहार सरकार ने फिर मांगा विशेष राज्य का दर्जा
पनगढ़िया ने कहा कि उन्हें पता है कि बिहार के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा (Special State Status) लंबे समय से चली आ रही मांग है, जिसका सामना उन्होंने नीति आयोग में अपने कार्यकाल के दौरान भी किया था. उन्होंने दोहराया कि यह वित्त आयोग के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है. इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सचिवालय स्थित संवाद कक्ष में आयोजित 16वें वित्त आयोग की बैठक में शाामिल हुये. इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि खुशी की बात है कि बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर 16वें वित्त आयोग का आगमन हुआ है.
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नीतीश ने किया वित्त आयोग का स्वागत
उन्होंने वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविन्द पनगढ़िया सहित सभी सदस्यों का बिहार में स्वागत करते हुए कहा कि आप सभी काफी अनुभवी एवं योग्य है और बिहार को आपसे काफी उम्मीदें हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गौरव की बात है कि आयोग के अध्यक्ष पनगढ़िया नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर के कुलाधिपति भी हैं. इसीलिए वह बिहार की सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि से परिचित हैं. बैठक में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा सहित अन्य कैबिनेट मंत्री और प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
बिहार ने वित्त आयोग के सामने दो मांगें रखीं
पनगढ़िया ने बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा, बिहार और कई अन्य राज्यों द्वारा उठाया गया एक और मुद्दा यह था कि उपकर और अधिभार के माध्यम से एकत्रित राजस्व केवल केंद्र के पास जाता था क्योंकि इसे विभाज्य पूल में शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने हालांकि, इस बात पर जोर दिया कि यह संविधान के प्रावधानों के अनुरूप है. किसी भी बदलाव के लिए केंद्र सरकार को एक संशोधन लाने की आवश्यकता होगी जिसे संसद में दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना चाहिए.
क्या कहा नीति आयोग ने, जानिए
केंद्र में निहित ऐसी शक्तियों के आधार को भी पनगढ़िया ने स्पष्ट करते हुए कहा, ‘युद्ध जैसी किसी आपात स्थिति में, केंद्र सरकार को बहुत तेजी से संसाधन जुटाने में सक्षम होना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘पिछले कई महीनों में, हमने औसतन प्रति सप्ताह एक राज्य का दौरा किया है. यह एक अच्छी प्रगति है, हालांकि हमें अभी भी सात और राज्यों का दौरा करना है….आयोग को इस साल 31 अक्टूबर तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है.’
बिहार की दूसरी मांग पर भी बोले पनगढ़िया
पनगढ़िया ने कहा कि बिहार सहित कम से कम 16-17 राज्यों द्वारा उठाई गई एक और मांग केंद्रीय करों की शुद्ध आय में राज्य सरकारों की हिस्सेदारी को 41 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की रही है. उन्होंने हालांकि सपष्ट करते हुए कहा, ‘हम अभी इस बारे में कुछ नहीं कह सकते… हम यह नहीं कह सकते कि आयोग क्या करने जा रहा है. अध्यक्ष सहित सभी पांच सदस्य हर मुद्दे पर चर्चा करते हैं और एक राय बनाते हैं.’