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Bihar Politics : समय बताएगा कि कौन बनेगा बिहार का सीएम, अमित शाह के बयान से छाया सस्पेंस

बिहार की राजनीति अब (Bihar Politics) धीरे धीरे दिल्ली को भी समझ में आने लगी हैं. हालंकी राजनीति कही की हो मौजूदा दौर में अपने चाल पैतरों पर ही टिकी हैं. फिलहाल बात बिहार की हैं. सूबे में साल के अंत महीने में विधानसभा के चुनाव होने हैं, मगर अभी बिहार की कमान एनडीए के हाथ में है. और यहाँ के सीएम नीतीश कुमार हैं.

एनडीए के प्रमुख दलों में बीजेपी और जेडीयू बड़ी पार्टी हैं. अकड़ो के मुताबिक जेडीयू के तुलना में बीजेपी के पास अधिक विधायक है. इसके बावजूद भी एनडीए ने नीतीश कुमार को बतौर सीएम कायम रखा हैं. इसका एक मात्र कारण हैं कि नीतिश कुमार बिहार में विकाश पुरुष के तौर पर जाने जाते हैं. जिसके चलते बीजेपी के प्रमुख नेताओ का कहना है कि इस बार होने वाले चुनाव भी नीतीश यानी जेडयू के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा.

अमित शाह के बयान का मतलब क्या?

बिहार चुनाव से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक बयान बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में सस्पेंस खड़ा कर दिया हैं. देश में मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने द इकोनॉमिक टाइम्स के पत्रकारों से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की थी. इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि बिहार में होने वाले चुनाव में एनडीए का सीएम उम्मीदवार कौन है? उसके बाद अमित शाह ने अपने जवाब में कहा कि यह तो समय ही तय करेगा कि बिहार का मुख्यमंत्री कौन होगा.

अमित शाह के इस बयान से बिहार की सियासत (Bihar Politics) में फुसुर फुसर होने लगी हैं. इस खबर को कई समाचार चैनलों ने प्रमुखता से प्रकाशित भी किया है. आपको मालूम हो कि बीजेपी और जेडीयू ने 2020 चुनाव संयुक्त रूप से लड़ा था. मगर नीतीश कुमार बाद में पलट गए और महागठबंधन के साथ गठजोड़ कर लिया. हालांकि ये कोई पहली बार का मामला नहीं था जब नीतीश कुमार ने बीजेपी को चकमा दिया था. इसलिए अमित शाह इस बार बिहार की आबो हवा को टटोलने में लगे हैं.

कल किसने देखा हैं?

अब नहीं पलटेंगे, कहने वाले बिहार के सीएम नीतीश अब तक पलटते ही आए हैं, इतना होने के बावजूद भी अंत तक बीजेपी इनके साथ गठजोड़ कर ही लेती हैं. इसका कारण यह हैं कि बिहार में बीजेपी का अपना कोई मजबूत सीएम खिलाड़ी नहीं हैं. इसलिए अमित शाह ने अपने बयान में एक लाइन और जोड़ते हुवे कहा कि ये स्पष्ट है कि हम यह चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ेंगे.

बीजेपी इस बार बिहार चुनाव में अपने बहुमत के लिए लड़ेगी, और वो जानती है कि बहुमत में आने के लिए उसे नीतीश कुमार का चेहरा का होना बहुत जरूरी हैं. राजनीति के जानकार सुनिल प्रियदर्शी का मानना है कि इस बार बीजेपी भूल से भी बहुमत में आ जाती है तो नीतीश पलटे या ना पलटे बीजेपी इसबार पलटने वाली जरूर हैं. मगर कल किसने देखा हैं.

अमित शाह का बयान

जानकारों की मानें, तो अमित शाह के इस जवाब के बाद विपक्ष पूरी तरह हमलावर है. कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि बिहार में बीजेपी का महाराष्ट्र प्लान बिल्कुल तैयार है. बीजेपी नीतीश कुमार को धोखा देने की फिराक में है. असित नाथ तिवारी ने कहा है कि बीजेपी की ऐसी तैयारी है कि अगल सफल रही, तो चुनाव बाद जेडीयू का नामो निशान मिट जाएगा. नीतीश कुमार का राजनीतिक अवसान इतना दुखदाई होगा जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की होगी. ध्यान रहे कि बीजेपी और जेडीयू एक साथ प्रचार में जुटे हुए हैं. सम्राट चौधरी से लेकर दिलीप जायसवाल तक 2025 में नीतीश के सीएम होने का दावा कर चुके हैं.


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सियासी बवाल तय

अमित शाह बयान के बाद से सियासी चर्चाओं का बाजार तेज हो गया. उन्होंने इस दौरान ये भी कहा कि चुनाव के मुद्दे हमेशा जनता तय करती है. मगर हमारा मानना है कि बिहार के लोगों के लिए विकास सबसे बड़ा मुद्दा है. इस मामले पर जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने साफ कहा है कि अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि बिहार एनडीए का नेतृत्व नीतीश कुमार ही करेंगे. ध्यान रहे कि ये पहली बार नहीं है, अमित शाह इससे पहले भी एक इंटरव्यू में एनडीए के सीएम कैंडिडेट के सवाल पर गोल मोल जवाब दिया था.

नीतीश का नेतृत्व

अमित शाह ने कहा था कि वे पार्टी के एक अनुशासित कार्यकर्ता हैं. इस तरह के मंच पर पार्टी के निर्णय नहीं लिए जाते हैं. पार्टी पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में इस पर विचार होगा और फिर फैसला किया जाएगा. अमित शाह के उस बयान के बाद भी सियासी बवाल मचा था. बिहार में महाराष्ट्र मॉडल लागू करने की बात कही गई थी. जानकारों के अलावा विपक्ष का अनुमान है कि रिजल्ट आने के बाद बीजेपी किसी और को मुख्यमंत्री बना सकती है. अमित शाह के उस बयान के बाद बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने उस पर सफाई दी थी तब मामला शांत हो गया था. अब एक बार फिर अमित शाह वही राग आलाप रहे हैं. अब देखना ये हैं कि ये राग बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में जेडीयू के लिए नासूर ना बन जाए.

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