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Voter Verification : वोटर वेरिफिकेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, आधार पहचान का प्रमाण, नागरिकता का नहीं

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को बिहार में SIR यानी वोटर वेरिफिकेशन (Voter Verification) के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई. कोर्ट ने कहा- आधार पहचान का प्रमाण पत्र है, नागरिकता का नहीं.

कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया कि वोटर (Voter Verification) की पहचान के लिए आधार को 12वें दस्तावेज के तौर पर माना जाए. बिहार SIR के लिए फिलहाल 11 निर्धारित दस्तावेज हैं, जिन्हें मतदाताओं को अपने फॉर्म के साथ जमा करना होता है.

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने ये भी कहा कि आधार कार्ड को लेकर अगर किसी तरह की शंका हो तो आयोग इसकी जांच कराए. कोई भी नहीं चाहता कि चुनाव आयोग अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल करे. केवल वास्तविक नागरिकों को ही वोट देने की अनुमति होगी. जो लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दावा कर रहे हैं, उन्हें मतदाता सूची से बाहर रखा जाएगा.

आधार मानने वाले BLO को आयोग नोटिस भेज रहा

सुनवाई शुरू होने पर कोर्ट में कांग्रेस लीडर और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा- 10 जुलाई को कोर्ट ने चुनाव आयोग को आधार कार्ड स्वीकार करने को कहा. अभी भी 65 लाख लोगों के लिए भी आधार स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं. बीएलओ को निर्देश दिया गया था कि 11 दस्तावेजों में से एक आवश्यक है.

चुनाव आयोग 11 के बाहर के दस्तावेज स्वीकार करने वाले अधिकारियों को दंडित कर रहा है. आधार स्वीकार करने वाले अधिकारियों को चुनाव आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इस पर कोर्ट ने नोटिस पेश करने को कहा. जिस पर चुनाव आयोग का पक्ष रख रहे वकील राकेश द्विवेदी ने कहा- ये हमारे पास नहीं है. जिसके जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा- ये आपके दस्तावेज हैं, इस पर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी का साइन है. अब इस मामले में अगले सोमवार यानी 15 सितंबर को सुनवाई होगी.


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सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन आवेदन को दी थी मंजूरी

इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया कि हटाए गए वोटर्स को लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए फिजिकली के अलावे ऑनलाइन आवेदन की अनुमति भी दें. कोर्ट ने ये भी कहा था कि आधार कार्ड समेत फॉर्म 6 में दिए गए 11 दस्तावेज में से कोई भी जमा किया जा सकता है, इनमें ड्राइविंग लाइसेंस, पासबुक, पानी का बिल जैसे डॉक्यूमेंट शामिल हैं.

कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों को मामले पर चुप्पी साधने के लिए भी फटकार लगाई थी और पूछा कि मतदाताओं की मदद के लिए आप क्या कर रहे हैं. आपको आगे आना चाहिए. इसके साथ ही अगली सुनवाई पर आपके द्वारा क्या किया गया, यह बताएंगे.

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