डुमरांव विधानसभा (Dumraon Assembly Election) बक्सर जिला का दूसरा अनुमंडल और बिहार के 243 विधानसभा सीटों में से एक है. साल 1952 में हरिहर प्रसाद और 1957 से लेकर 1962 तक गंगा प्रसाद कांग्रेस से विधायक रहे. साल 1967 में हरिहर प्रसाद एक बार फिर से निर्दलीय विधायक बने. उसके बाद साल 1972 में वो कांग्रेस से चुनाव लड़े और विधायक बने.

साल 1977 में डुमरांव की जनता का मिजाज बदला और इस बार सीपीई से आए रामाश्रय सिंह को विधायक का ताज पहना दिया. मगर रामाश्रय सिंह केवल दो साल ही यहा से विधायक रहे. 1980 के चुनाव में कांग्रेस से राजाराम आर्य ने रामाश्रय सिंह को हरा दिया. मगर ये भी केवल एक साल तक ही विधायक रहे. साल 1981 में वी.एन भारती कांग्रेस से विधायक बने.
कॉंग्रेस का पतन
हालांकि डुमरांव विधानसभा (Dumraon Assembly Election) शुरू से कांग्रेस का गढ़ रहा था. मगर 1985 में कांग्रेस से बसंत सिंह अंतिम विधायक बने. और उसके बाद कांग्रेस का डुमरांव विधानसभा से हमेशा के लिए नामो निशान मिट गया.

साल 1990 के चुनाव में सीपीई के सूरज बाबू और जनता दल से बसंत सिंह के बीच कड़ा मुकाबला हुआ. और बसंत सिंह 1162 वोट से जीत गए. इस तरह 1995 में भी बसंत सिंह जनता दल से डुमरांव विधानसभा (Dumraon Assembly Election) से दो बार विधायक बने रहे.
निर्दलीय विधायक बने ददान पहलवान
दशकों बाद डुमरांव की जनता ने नई करवट ली. साल 2000 आते आते सब कुछ बदला चुका था. इस बार यहां से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ददन पहलवान आए. और उनके सामने समता पार्टी से रामबिहारी सिंह मैदान में थे. मगर इस बार जनता ने दल के बजाय निर्दलीय पर भरोसा जताया और ददन पहलवान पहली बार डुमरांव से विधायक बने.
ददन पहलवान लगातार तीन बार 2000 में निर्दलीय, 2005 (फरवरी) समाजवादी पार्ट और 2005 (अकतूबर) में अखिल जन विकाश दल से विधायक बने रहे.
साल 2010 में यहां JDU और RJD के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला और JDU का डुमरांव विधानसभा सीट (Dumraon Assembly Election) पर पहली बार खाता खुला. और दाऊद अली विधायक बने. हालांकि नीतीश कुमार की बढ़ती लोकप्रियता से 2015 का विधानसभा चुनाव भी जेडीयू के खाते में चली गई. मगर इस बार ददन पहलवान विधायक बने.
1977 के बाद 2020 में खुला लेफ्ट का खाता
साल 2020 में डुमरांव विधानसभा में एक नए सूरज का उदय हुआ. सामाजिक ताने बाने ऐसे बदले की पूरी जनता का मूड बदल गया. नतीजा 2020 विधानसभा चुनाव में जेडीयू से अंजुम आरा आई और CPIML यानी माले से अजित कुशवाहा को टिकट मिला. और 1977 के बाद एक बार फिर से वामदल के सूखे मैदान पर हरियाली छा गई. और अजित कुशवाहा 24415 वोटो से विजय हुवे.
अब साल 2025 में भी माले से अजित कुशवाहा का टिकट कन्फर्म है. वहीं JDU से धीरज कुशवाहा भीं दावेदारी में जुट हुवे है. तो दूसरी तरफ ददन पहलवान की भी फील्डिंग शुरू है. मगर किस दल से आयेंगे ये कहना थोड़ा मुश्किल है. इस बीच जन सुराज से शिवांग विजय सिंह का भी टिकट कन्फर्म माना जा रहा है. साथ ही डुमरांव विधानसभा सीट पर बंटी शाही, रवि उज्जवल, अंजुम आरा जैसे कई उम्मीदवारों के आने की सूचना हैं.


