डिप्टी CM विजय सिन्हा (Deputy CM Vijay Kumar) के जनता दरबार को लेकर बिहार राजस्व सेवा संघ ने मुख्यमंत्री को लेटर लिखकर शिकायत की है। लेटर जारी कर संघ ने कहा है कि जनता दरबार के नाम पर डिप्टी CM अफसरों को अपमानित कर रहे हैं। खड़े-खड़े सस्पेंड कर दूंगा, जज ने हड़बड़ी में फैसला कैसे सुनाया, जनता के सामने जवाब दो, अब पब्लिक काम लटकाया तो ठीक नहीं होगा, DM, SP सुन रहे हो ना इस तरह की भाषा नहीं चलेगी।

संघ ने कहा है कि जनता दरबार के नाम पर सुनवाई में डिप्टी CM अफसर से बदतमीजी कर रहे हैं, गाली गलौज हो रही है। सार्वजनिक मंच से इंसल्ट की जा रही है। ये बंद नहीं हुआ तो हम काम बंद कर देंगे।
बिहार राजस्व सेवा संघ का CM को लेटर
मंत्री विजय सिन्हा सार्वजनिक मंचों, मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए राजस्व अधिकारियों के खिलाफ लगातार अपमानजनक भाषा, बदतमीजी, गाली-गलौज जैसे शब्दों और ‘ऑन द स्पॉट’ फैसलों की बात कर रहे हैं। जो न सिर्फ प्रशासनिक मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि संविधान, कानून और न्यायिक व्यवस्था की भावना पर भी चोट करता है। यह सिर्फ लोकप्रियता के लिए की जा रही है।

मंत्री बोल रहे ‘खड़े-खड़े सस्पेंड कर देंगे’, ‘यहीं जनता के सामने जवाब दो’, ‘स्पष्टीकरण लो और तुरंत कार्रवाई करो’ ‘ऑन द स्पॉट फैसला होगा’। इस तरह की चीजें किसी संवैधानिक लोकतंत्र के अनुरूप नहीं है। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस पूरे तमाशे में विभाग के कुछ वरीय अधिकारी भी साथ दे रहे हैं, जिससे यह मैसेज जाता है कि संस्थागत संरक्षण की जगह व्यक्तिगत लोकप्रियता को प्राथमिकता दी जा रही है।
आम जनता के बीच राजस्व प्रशासन का गलत संदेश जा रहा
राजस्व सेवा संघ का कहना है कि मंत्री का अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से ‘अंचल अधिकारी’, ‘राजस्व कर्मचारी’ कहकर कठघरे में खड़ा करना, उन्हें भ्रष्ट, अयोग्य और नाकारा साबित करने की कोशिश करना बेहद गलत और दुर्भाग्यपूर्ण है।
इससे आम जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि पूरा राजस्व प्रशासन ही दोषी है, जबकि सच्चाई यह है कि भूमि विवाद और भूमि सुधार की समस्या दशकों पुरानी, जटिल और संरचनात्मक है।
संघ ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि भूमि सुधार की विफलता के लिए सिर्फ वर्तमान अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराना न तो न्यायसंगत है और न ही ईमानदार सोच का परिचायक है। आजादी के बाद से लेकर अब तक कई कानून, अभियान और योजनाएं लागू हुईं, लेकिन मूल समस्याएं बनी रहीं। इसके बावजूद हर बार निशाना फील्ड में काम कर रहे अधिकारियों को बनाया जा रहा है।
विजय सिन्हा की भाषा लोकतांत्रिक शासन नहीं, बल्कि भीड़ तंत्र की ओर कर रहा है इशारा
शिकायत में यह भी कहा गया है कि मंत्री का यह अंदाज’ जन अदालत’, ‘फील्ड ट्रायल’, “ऑन द स्पॉट इंसाफ’ जैसे शब्दों के सहारे प्रशासन चलाने की कोशिश जैसा है, जो लोकतांत्रिक शासन नहीं बल्कि भीड़तंत्र की ओर इशारा करता है।
संघ ने सवाल उठाया है कि क्या इसी तरह पुलिस, न्यायाधीश, डॉक्टर या अन्य विभागों के अधिकारियों को भी सड़कों पर खड़ा कर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाएगा?
राजस्व सेवा संघ ने चेतावनी दी है कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ और अधिकारियों के सम्मान और गरिमा की रक्षा नहीं की गई, तो वे सामूहिक अवकाश (मास लीव) जैसे कठोर कदम उठाने पर मजबूर होंगे। इसका असर पूरे राज्य की राजस्व व्यवस्था, भूमि संबंधी कार्यों और जनसेवा पर पड़ सकता है।


