बिहार से शुरू हुए जेपी आंदोलन (JP Movement) ने पूरे देश में एक ऐतिहासिक राजनीतिक परिवर्तन किया था. चूंकि एक निरंकुश और अधिनायकवादी सत्ता से जनता को मुक्ति मिली थी, इसलिए इसे ‘दूसरी आजादी’ भी कहा जाता है. इसी आंदोलन से उपजे नेता लालू प्रसाद और नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने. स्वर्गीय सुशील कुमार मोदी उपमुख्यमंत्री बने.

जेपी आंदोलन (JP Movement) के दौरान कांग्रेस की सरकार ने लालू प्रसाद, नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी समेत कई छात्र नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था. मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब 2012 में सेवा यात्रा के दौरान बक्सर आये थे तो वहां के जेल को देख कर बहुत भावुक हो गए थे. उस समय उन्होंने अपनी जेल यात्रा से जुड़ी यादें साझा की थीं.
जून 1976 में जब नीतीश कुमार गिरफ्तार हुए थे, तब उनकी आरा के तत्कालीन जिलाधिकारी से जोरदार बहस हुई थी. कांग्रेस सरकार नीतीश कुमार के नारा गढ़ने की काबिलियत और पर्चा लिखने की ताकत से बहुत डरती थी. इसलिए, उन्हें बदल-बदल कर आरा, बक्सर और भागलपुर के तीन जेलों में रखा गया.

जेपी आंदोलन में नीतीश कुमार
जेपी आंदोलन (JP Movement) के समय नीतीश कुमार छात्रों को एकजुट और प्रेरित करने के लिए उत्साही भाषण देते थे. इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले नीतीश कुमार लिखत-पढ़त में बहुत तेज थे. इसलिए उन्हें ही आंदोलन से जुड़ी प्रेस विज्ञप्ति लिखने की जिम्मेदारी दी गई थी. फिर वे भूमिगत होकर आंदोलन को गति देने लगे. नीतीश कुमार के मित्र उदयकांत ने एक किताब लिखी है, ‘नीतीश कुमार: अंतरंग दोस्तों की नजर में’. इस किताब के मुताबिक, 26 जून 1975 को नीतीश पटना इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में एक मित्र के कमरे में आए हुए थे.
वे कहीं बाहर निकलने की तैयारी कर रहे थे. तभी वो मित्र भागता हुआ आया और जोर-जोर से कहने लगा कि इमरजेंसी लग गई है. उसने नीतीश कुमार से आगे कहा, ‘ये कोई बड़ी घोषणा है, पुलिस तुम्हें पकड़ने आती ही होगी. अब तुम जल्दी निकलो यहां से. वे वहां से निकले और कदमकुआं स्थित जेपी के घर के पास पहुंचे. वहां कई और छात्र जमा हो चुके थे. वहां पता चला कि जेपी (JP Movement) तो दिल्ली में गिरफ्तार हो चुके हैं. शहर में चारों तरफ पुलिस फैल चुकी थी. प्रेस पर सेंसर लगा दिया गया था. अखबार में सरकार की पसंद वाली एकतरफा खबरें छपतीं.’
नीतीश की बक्सर जेल की यादें
2012 में उन्होंने बक्सर में बिहार के पहले ओपन जेल का उद्घाटन किया. तब नीतीश कुमार ने अपना संस्मरण सुनाया था, बक्सर जेल से मेरा भावनात्मक लगाव है. जेपी आंदोलन के समय गिरफ्तारी के बाद मुझे पहले आरा जेल में रखा गया था. फिर वहां से बक्सर जेल लाया गया था. 1980 के बाद प्रेस एक्ट के खिलाफ जब आंदोलन हुआ तो मुझे गिरफ्तार कर जेल में डाला गया था. उस समय जाड़े का समय था. तब बक्सर जेल से मिले कंबल ही जाड़े में काम आया. यानी नीतीश कुमार कांग्रेस के राज में दो बार गिरफ्तार हुए थे, एक बार जेपी आंदोलन (JP Movement) के समय और दूसरी बार जग्गनाथ मिश्र की सरकार के समय.
बाढ़ आई तो पटना से किया गांवों का रुख
पुलिस छात्र नेताओं को खोज-खोज कर पकड़ रही थी. अन्य नेताओं की तरह नीतीश कुमार भी भूमिगत गए. चूंकि, अखबार में आंदोलन की खबरें नहीं छपती थीं इसलिए खुद पर्चा निकालने का फैसला हुआ. नीतीश छात्रों और अन्य लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए हाथ से लिखकर पर्चा बनाते और बांटते. वे नारा गढ़ने में माहिर थे. 1975 के अगस्त में पटना में भयंकर बाढ़ आ गई थी. तब पुलिस की धर-पकड़ से बचने के लिए नीतीश कुमार ने गांवों की तरफ रुख किया. वे एक गांव से दूसरे गांव में छिपकर काम करते रहे. पीछे-पीछे पुलिस खोजती रहती.
इसी क्रम में वे गया में फल्गु नदी के किनारे खादी ग्रामोद्योग के पास पहुंचे. उनके साथ लालू प्रसाद और जगदीश शर्मा भी थे. वहां एक सभा थी. नीतीश कुमार भाषण दे रहे थे. तभी अचानक पुलिस पहुंच गई. सभी जान बचाने के लिए जैसे-तैसे वहां से भागने लगे. बहुत देर भागने के बाद नीतीश कुमार और लालू प्रसाद सुनसान जगह पर पहुंचे. इस भागदौड़ में नीतीश कुमार की मूंगा जड़ी सोने की अंगूठी फल्गु नदी में कहीं गिर गई. ये अंगूठी उन्हें उनकी दादी ने दी थी.
भोजपुर में हुई नीतीश कुमार की गिरफ्तारी
इसी क्रम में पुलिस से बचने के लिए नीतीश कुमार 9 जून 1976 को भोजपुर जिले के दुबौली गांव पहुंचे. दरअसल, नीतीश कुमार अपने अन्य सहयोगियों के साथ समाजवादी नेता रामइकबाल सिंह से मिलने गए थे, जिन्हें राममनोहर लोहिया ‘पीरो का गांधी’ कहते थे. इस इलाके में नक्सली आंदोलन पहले से चल रहा था, इसलिए पुलिस काफी मुस्तैद थी. नीतीश कुमार के एक मित्र महेंद्र दुबे संदेश थाने के दुबौली गांव के थे. दुबौली में रामइकबाल सिंह की एक सभा करने का फैसला हुआ. बैठक गांव के बाहर होनी थी.
पुलिस की आने की सूचना पहले मिलने के लिए एक साथी को सभा स्थल से बहुत पहले सड़क की तरफ भेज दिया. लेकिन, जिस व्यक्ति को खबरी का काम सौंपा गया था, उसे अपने बच्चे के इलाज के लिए अचानक अस्पताल जाना पड़ गया. उसने अपने बदले किसी और को खबरी के रूप में भेज दिया. नए खबरी ने पुलिस को गलत जानकारी देकर गच्चा तो दे दिया लेकिन सभा करने वाले नेताओं को पुलिस की खबर नहीं दे सका. पुलिस इधर-उधर घूमी. एक बच्चे से सभा के बारे में पूछा तो उसने मासूमियत से बता दिया. इसके बाद पुलिस ने महेंद्र दुबे के घर को चारों तरफ से घेर लिया. इस तरह नीतीश कुमार अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार हो गए. गिरफ्तारी के बाद उन्हें आरा जेल में रखा गया.
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तीन जेलों में रहे नीतीश कुमार
गिरफ्तारी के बाद नीतीश कुमार की आरा के तत्कालीन जिलाधिकारी से बहुत बहस हुई थी. वे प्रमोटी आईएएस थे. बहस के दौरान डीएम ने नीतीश कुमार से पूछा, तुम इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हो? तब नीतीश ने जवाब दिया, जब मालूम है तो गिरफ्तार क्यों किया? फिर डीएम ने जवाब दिया, हम रिमांड पर लेकर पूछताछ करना चाहते हैं. इस गिरफ्तारी के विरोध में रामइकबाल सिंह (पीरो के गांधी) ने एक जबर्दस्त प्रदर्शन आयोजित किया. डॉक्टर ने अपनी जांच में नीतीश कुमार को अस्वस्थ पाया.
इस मेडिकल रिपोर्ट के कारण नीतीश कुमार को आरा जेल में ही रखा गया. फिर कुछ दिनों के बाद बक्सर जेल में शिफ्ट किया गया. पुलिस इतने पर भी नहीं मानी. नीतीश कुमार को बक्सर से भागलपुर सेंट्रल जेल लाया गया. कुल मिला कर वे नौ महीने तक जेल में रहे. और इतने संघर्षो के बाद नितीश कुमार आज देश के सफल मुख्यमंत्रियों में से एक हैं.


